कटघोरा: कोरोना से निजात दिलाने वाले तहसीलदार का आश्चर्यजनक तरीके से बस्तर किया तबादला.. सरकार के फैसले से शहरवासी हैरान.. कर रहे है ट्रांसफर रोके जाने की पुरजोर मांग

प्रदेश में भूपेश बघेल की अगुवाई में नई सरकार बनने के बाद से ही विपक्ष के तौर पर भाजपा और जेसीसी के विधायक, नेता सड़क से लेकर सदन तक सरकार और समूचे कांग्रेस पर हमलावर रहे है. सत्ता और संगठन में बैठे लोगों पर विपक्ष ने कई गंभीर सवाल खड़े किए है. इनमे ज्यादातर आरोप सरकार पर अपने घोषणाओं को पूरा नही करने, रेत, कबाड़, खनिज संसाधन से जुड़े काले कारोबार को छूट देने और सूबे में अपराध का ग्राफ बढ़ने जैसे आरोप प्रमुख रहे है. कोरोना काल मे भी दाऊ जी की सरकार आरोपो से इतर नही रही. विपक्ष का मानना है कि बघेल कैबिनेट ने कोरोना माहमारी से निबटने के लिए जो कदम उठाए वो ना सिर्फ नाकाफी थे बल्कि सरकार की दोषपूर्ण स्वास्थ्य नीति ने इस जानलेवा बीमारी को फलने फूलने के साथ राज्यभर में फैलने का भी भरपूर मौका दिया. इसके अलावा खुद की वाहवाही के लिए सरकारी विज्ञापनों के सिलसिले ने विपक्षियों के गुस्से को और भी भड़काने का काम किया है.

लेकिन इन सबसे इतर सरकारी तंत्र पर जो बड़े आरोप 14 साल बाद लौटी कांग्रेस की सरकार पर लगते रहे हैं वह सीधे प्रशासनिक महकमे से जुड़ा हुआ है. प्रदेश सरकार पर सबसे बड़ा आरोप यह रहा है कि सूबे में ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अफसरों को काम करने का मौका नही दिया जा रहा. इनमे भारतीय प्रशासनिक सेवा से लेकर राज्य सेवा के अधिकारी भी शामिल हैं. पुलिस से लेकर संविदा के कर्मचारी भी शामिल हैं. भाजपा यह कहते हुए हमेशा घेरने की कोशिश में रहती है कि सरकार और कांग्रेस संगठन के भीतर के लोग पुलिस और दूसरे महकमो के अफसरों का पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर उनके ताबदला कराने में जुटे हुए है. पूर्व आईएएस और मौजूदा भाजपा नेता ओपी चौधरी ने भी सरकार के कामकाज के तरीके पर सवाल खड़े किए है. उन्होंने मीडिया से होने वाली बातचीत में कई दफे भूपेश सरकार पर अपराधियों को संरक्षण देने और प्रदेश में तबादला-पोस्टिंग उद्योग चलाने जैसे गंभीर आरोप मढ़े है. भाजपा के नेताओ के साथ खुद कांग्रेस से जुड़े नेताओ का मानना है कि प्रदेश में तबादला और पोस्टिंग का दौर जारी है. मनमाफिक अफसरों की पदस्थापना से लेकर उन्हें दूर-दराज इलाको में भी भेजा जा रहा है. इस तरह के कई हालात कोरबा जिले में भी नजर आए जब संकट के दौर से गुजर रहे सरकार का ध्यान अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग में अधिक रही.

बात करे प्रदेश के सबसे पहले कोरोना हॉटस्पॉट के तौर पर उभरे कटघोरा की तो यहां भी अफसरों के एकाएक तबादले किसी के गले नही उतर रहा है. कोरोना संकट के बीच पूर्व में एसपी जेएस मीणा का ट्रांसफर, इसके बाद एकाएक एएसपी यू उदयकिरण की विदाई और अब कटघोरा तहसीलदार रोहित सिंह के तबादले के एकल आदेश से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है. एकल आदेश होने के साथ ही मुख्यमंत्री का अनुमोदन और बस्तर संभाग में हुई नई पदस्थापना विपक्ष के कथित ट्रांसफर-पोस्टिंग उद्योग वाले आरोपो को मजबूत कर रहे है. हालांकि सरकार से जुड़े लोग इस तबादले को रूटीन प्रक्रिया बताते हुए पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे बावजूद एक तहसीलदार के ट्रांसफर के लिए सरकार के शीर्ष संस्थान ने जिस प्रकिया के सहारा लिया वह सरकार के ट्रांसफर नीति पर भी सवाल खड़े कर रहे है. वही जिस अफसर ने पहले ही चार वर्ष नारायणपुर सरीखे क्षेत्र में बिताए हो उन्हें फिर से पुरानी जगह भेजा जाना काफी आश्चर्यजनक है.

कटघोरा आज कोरोना जैसी माहमारी से आंशिक रूप से मुक्त हो चुका है और अब हालात सामान्य भी हो रहे है लेकिन इस हॉटस्पॉट को कोरोना के संकट से भर निकालने में जिन अफसरों की सबसे अहम भूमिका रही उनका एकाएक और अव्यवहारिक ट्रांसफर हर शहरवासी को सोचने पर मजबूर कर रहा है. दो दिन पहले रोहित सिंह का तबादला बस्तर संभाग के बीजापुर कर दिया गया जो कई वजहों से हैरानी भरा फैसला था. कटघोरा नगर जिस पर अब भी माहमारी के संकट के बादल मंडरा रहा हो. जहां अबतक सौ से ज्यादा मरीजों की पहचान की जा सकी हो वहां से तहसीलदार स्तर के अफसर को हटाया जाना न्यायोचित नही कहा जा सकता. रोहित सिंह पर ना सिर्फ कटघोरा बल्कि समूचे तहसील का दारोमदार रहा. सबसे कड़े लॉकडाउन को सफल तरीके से उन्होंने क्षेत्र में लागू कराया. 144 के उल्लंघन पर उनकी पैनी नजर बनी रही जबकि जिला कलेक्टर के निर्देशन व एसडीएम सूर्यकिरण तिवारी के मार्गदर्शन में लॉकडाउन के दौरान युवाओ की टीम तैयार करते हुए उन्होंने जिस तरह जरूरी सामानों की घर पहुंच सेवा सुनिश्चित कराई उसकी तारीफ खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी की थी.

रोहित सिंह क्षेत्र के भौगोलिक और सामाजिक स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ है. कोरोना के कंटेन्मेंट जोन में वे खुद अपनी मौजूदगी दर्ज कराते है और राजस्व के साथ पुलिस व नगरीय निकाय के कर्मियों को दिशानिर्देश भी देते है. जानलेवा कोरोना के खिलाफ शहर के लोगो का विश्वास जीतकर उन्होंने ना सिर्फ शहर को सुरक्षित रखा बल्कि बीमारी के फ़ैलाव को रोकने में भी उनकी भूमिका सबसे अहम रही. कटघोरा नगर में जो शुरुवाती मरीज पाएं गए थे वे मुस्लिम समाज से जुड़े हुए थे. तब्लीगी जमात के कोरोना कनेक्शन के दौरान भी उन्होंने शहर में साम्प्रदायिक सौहार्द कायम रखने के लिए जो कदम उठाये उसकी प्रशंसा समाज का हर वर्ग कर रहा है. इस तरह एक अफसर जो अपनी टीम के साथ कटघोरा को कोरोना मुक्त करने और पुराने हालात कायम करने के लिए जूझ रहे है उनके ट्रांसफर से न सिर्फ राजस्व दल का मनोबल गिरेगा बल्कि कटघोरा जो अबतक कोविड से जुड़े प्रोटोकॉल का जितने बेहतर तरीके से पालन हुआ है वह आगे भी होता रहेगा इस पर प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है.