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बिलासपुर : आपत्ति के बिना निराकरण किये नायब तहसीलदार प्रकर्ति ध्रुव ने नामांतरण किया … पटवारी ने अपने प्रतिवेदन में आपत्ति का किया था उल्लेख.. बावजूद नायब तहसीलदार ने नजरअंदाज कर किया नामांतरण…एसडीएम कोर्ट में नामांतरण पंजी को चुनौती का लगा है प्रकरण!!

बिलासपुर/रितेश गुप्ता -: इस समय बिलासपुर तहसील के क्या कहने तुम कुछ भी लिखो हम वही करेंगे जो हमको अच्छा लगेगा। ताजा मामला सिरगिट्टी क्षेत्र के जमीन जिसका खसरा नंबर 637 है में की गई आपत्ति का है । राजाराम प्रजापति द्वारा आपत्ति लगाई गई कि ये जमीन उसके पुरखो की है जिसे एक व्यक्ति अपने नाम चढ़ा लिया है और उसे बिक्री कर रहा है मामला छोटा नही बड़ा है एसडीएम कार्यालय में नामान्तरण पंजी को चैलेंज का प्रकरण दर्ज भी है, तहसीलदार के यहां से स्टे भी मिला हुआ था लेकिन उसे अतिरिक्त क्लेक्टर राजस्व से स्टे खारिज करा लिया गया जबकि अतिरिक्त कलेक्टर ने दूसरे पक्ष को सुना ही नही और स्टे को खारिज भी कर दिया । लेकिन इसका ये मतलब कतई नही की प्रकरण का निराकरण हो गया है, जब तक केस का निराकरण नही हो जाता तब तक उस खसरे में किसी भी प्रकार का खरीदी बिक्री के साथ नामांतरण नही किया जाना चाहिए था?

नगर निगम ने भी इस खसरे नम्बर 637 को अवैध प्लाटिंग घोषित कर रजिस्ट्री में रोक लगा रखी है-:

नगर निगम बिलासपुर के द्वारा सिरगिट्टी स्थित खसरा नम्बर 637 को अवैध प्लाटिंग घोषित करते हुए ठेकेदार से लेकर जिन्होंने इस अवैध कालोनी में मकान बना रहे है सबको नोटिस जारी किया हुआ है इसके अलावा नगर निगम ने जिला उपपंजीयक को एक पत्र भी लिखा जिसमे इस खसरे का पंजीयन नही करने को कहा उसके साथ ही उसकी प्रतिलिपि कलेक्टर बिलासपुर, एसडीएम, तहसीलदार, सभी को इस खसरे नम्बर 637 में हो रही अवैध प्लाटिंग की जानकारी दी लेकिन उसके बाद भी नायब तहसीलदार प्रकर्ति ध्रुव ने इस खसरे पर अभी हाल ही में दो नामान्तरण कर दिया है ।

जबकि नायब तहसीलदार को इस खसरे में न तो डिजिटल हस्ताक्षर जारी करनी चाहिए था और न ही किसी प्रकार का नामान्तरण किया जाना चाहिए था। इतने गम्भीर प्रकरण में नायब तहसीलदार प्रकर्ति ध्रुव ने गम्भीरता से नही लिया और नामान्तरण पर नामान्तरण करती जा रही है जबकि बिलासपुर तहसील में सीधे सीधे प्रकरण में व्यक्ति सालों से भटक रहा है उसका कार्य नही हो पा रहा है रोज किसी न किसी अखबार की सुर्खियां बन रहा पर तहसील में कोई सुधार नही हो पा रहा है सीधे सीधे प्रकरण तो हो नही पा रहे है लेकिन गम्भीर प्रकरण में कितनी गम्भीरता है कि बिना निराकरण के नामान्तरण पर नामांतरण किया जा रहा है ये किस बात की ओर इशारा कर रहा है ये आप भलीभांति जान सकते है । बिलासपुर तहसील वैसे ही सुर्खियों में रहने की आदि हो चुकी है आये दिन किसी न किसी की तकलीफ चौथे स्तम्भ द्वारा उठाया जा रहा है लेकिन ऊपर बैठे उच्चाधिकारियों को शायद ये नही दिख पा रहा है।